हमारे देश में शिक्षा का स्तर और प्रबंध,-

कोविड-19 के वजह से आज प्राचीन समय से चली आ रही शिक्षा प्रणाली में आमूल चूल परिवर्तन देखने को मिल रहा है,सरकार एक नई शिक्षा प्रणाली पर काम कर रही है।लेकिन पहले हमको ये जानना बहुत जरूरी है कि आज देश में शिक्षा का क्या स्तर है,आज कल स्कूल में बच्चे पढ़ने कम मनोरंजन करने ज्यादा जाते है ।कारण यह है कि हमारे देश में निजीकरण पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है,और सरकारी शिक्षा प्रणाली पर सरकार का ध्यान नहीं है जो चिंतन का विषय है,इसके लिए मौजूदा सरकार ही नहीं दोषी है बल्कि आजादी के बाद से शिक्षा पर ज्यादा खर्च नहीं किया गया,सरकारी स्कूल में संसाधन कि भारी मात्रा में कमी है, योग्य शिक्षक भी बहुत कम है,आज कल सरकारी स्कूल के शिक्षक आलसी हो गए है वो पढ़ाना नहीं चाहते या एक शब्द में कहे तो पढ़ाने के योग्य ही नहीं है,इस वजह से हमारे समाज में जो मेधावी छात्र गरीब परिवार से है उनकी शिक्षा पूरी नहीं हो पाती और उनकी आर्थिक स्थिति इतनी बढ़िया नहीं होती कि वो प्राइवेट स्कूल में उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपना व अपने देश का भविष्य निर्धारित कर सके ये है शिक्षा का स्तर।अब वर्तमान समय में ऑनलाइन शिक्षा पिछले कुछ महीनों से चलाई जा रही है,जिससे हमारे समाज में जो गरीब तबके के लोग है वो वंचित हो रहे है और कितने ऐसे छोटे छोटे कस्बे गाव हमारे देश में है जो इतने विकसित नहीं हुए है किआज के समय में इस शिक्षा प्रणाली को फालो कर सके,इसलिए सरकार को थोड़ा सा ध्यान हमारे शिक्षा प्रणाली पर भी देना चाहिए,शिक्षा बिल्कुल मुफ्त होनी चाहिए चाहे वो निम्न स्तर कि हो या उच्च, अन्य उपयोगी वस्तु भले महगी हो लेकिन शिक्षा मुफ्त होनी ही चाहिए। क्योंकि वर्तमान समय में शिक्षा ही ऐसा शस्त्र है जो समाज में फैली सारी विषमताओं को दूर कर सकती है, और समाज में एक नया बदलाव देखने को मिलेगा जब उच्च शिक्षा फ्री होगी। अगर उच्च शिक्षा फ्री होती तो हर घर में एक डॉक्टर एक वकील एक जज होते आज इतनी बेरोजगारी नहीं होती इतनी मारामारी नहीं होती इतना भ्रष्टाचार नहीं व्याप्त होता समाज में, उम्मीद करते है कि भविष्य में इस विषय पर कोई चिंतन हो और हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को दुरुस्त कर के के निशुल्क और मजबूत हो क्योंकि पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया ।।

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